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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 8
बली बलारातिबलातिशातनं दिग्दन्तिनादद्रवनाशनस्वनम् । महीधराम्भोधिनवारितक्रमं ययौ रथं घोरमथाधिरुह्य सः ॥
बलशाली तारकासुर उस भयानक रथ पर आरूढ़ हुआ, जिसकी गर्जना दिशाओं के हाथियों को कंपित करने वाली और पर्वतों तथा समुद्रों को विचलित करने वाली थी।
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