देव और असुर सेनाओं के समुद्र के समान व्यापक समूह के प्रलय के लिए एकत्र होने पर ऐसा घोर कोलाहल उत्पन्न हुआ, जो पर्वतों के तटों को टकराने वाला और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को भर देने वाला था।
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