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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 52
परस्परं वज्रधरस्य सैनिका द्विषोऽपि योद्धं स्वकरोद्धृतायुधाः । वैतालिक श्राविततारविक्रमाभिधानमीयुर्विजयैषिणो रणे ॥
वज्रधारी इन्द्र के सैनिक और शत्रु दोनों ही अपने-अपने आयुध उठाकर, वैतालिकों द्वारा उनके पराक्रम का घोष सुनते हुए, विजय की इच्छा से युद्ध में आगे बढ़े।
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