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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 48
पुरः स्थितं देवरिपोश्चमूचरा बलद्विषः सैन्यसमुद्रमभ्ययुः । भुजं समुत्क्षिप्य परेभ्य आत्मनोऽभिधानमुच्चैरभितो न्यवेदयन् ॥
देवशत्रु के सामने खड़े होकर देवसेना के योद्धा अपनी भुजाएँ उठाकर ऊँचे स्वर में अपना परिचय देते हुए आगे बढ़े।
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