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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 47
ततो महेन्द्रस्य चराश्चमूचरा रणान्तलीलारभसेन भूयसा । पुरः प्रचेलुर्मनसोऽतिवेगिनो युयुत्सुभिः किं समरे विलम्ब्यते ॥
तब इन्द्र की सेना के अग्रणी योद्धा युद्ध के उत्साह से भरकर मन की गति से भी तेज आगे बढ़े—युद्ध में विलंब क्यों किया जाए?
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