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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 46
पुरः सुराणां पुतनां प्रथीयसीं विलोक्य वीरः पुलकं प्रमोदजम् । बभार भूनाथ स बाहुदण्डयोः प्रचण्डयोः सङ्गरकेलिकौतुकी ॥
देवताओं की विशाल सेना को सामने देखकर वह वीर अत्यन्त प्रसन्न होकर रोमांचित हो उठा और अपने भुजबल में उत्साह भरकर युद्ध के लिए तैयार हुआ।
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