दासीकृताशेषजगत्त्रयं न मां जिगाय युद्धे कतिशः शचीपतिः । गिरीशपुत्रस्य बलेन साम्मतं ध्रुवं विजेतेति स काकुतोऽहसत् ॥
मैंने सम्पूर्ण जगत को वश में कर लिया है और इन्द्र भी मुझे कई बार युद्ध में नहीं जीत सका—अब क्या शिवपुत्र के बल से वह मुझे जीत लेगा? ऐसा कहकर वह उपहास करने लगा।
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