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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 37
न जामदग्यः क्षयकालरात्रिकृत्स क्षत्रियाणां समराय वल्गति । येन त्रिलोकीसुभटेन तेन कुतोऽवकाशः सह विग्रहग्रहे ॥
वह परशुराम जैसा महावीर भी उसके सामने युद्ध करने का साहस नहीं करता, तो तुम उसके साथ युद्ध करने का अवसर कैसे पा सकते हो?
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