दैत्यराज के नगर में एकत्र होकर, मुकुट सहित अंजलि बांधकर प्रणाम करते हुए उन्होंने निवेदन किया कि मन्मथशत्रु का पुत्र युद्ध के इच्छुक होकर इन्द्र के साथ आ पहुँचा है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।