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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 3
समेत्य दैत्याधिपतेः पुरे स्थिताः किरीटबद्धाञ्जलयः प्रणम्य ते । न्यवेदयन्मन्मथशत्रुसूनुना युयुत्सुना जम्भजितं सहागतम् ॥
दैत्यराज के नगर में एकत्र होकर, मुकुट सहित अंजलि बांधकर प्रणाम करते हुए उन्होंने निवेदन किया कि मन्मथशत्रु का पुत्र युद्ध के इच्छुक होकर इन्द्र के साथ आ पहुँचा है।
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