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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 29
निवार्यमाणैरभितोऽनुयायिभिर्ग्रहीतुकामैरिव तं मुहुर्मुहुः । अपाति गृधैरभिमौलिमाकुलैर्भविष्यदेतन्मरणोपदेशिभिः ॥
अनुयायियों द्वारा बार-बार रोके जाने पर भी, गिद्ध उसके सिर पर मंडराने लगे मानो उसके आने वाले मृत्यु का संकेत दे रहे हों।
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