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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 25
अपीति पश्यन्परिणामदारुणां महत्तमां गाढमरिष्टसन्ततिम् । दुर्दैवद्‌ष्टो न खलु न्यवर्तत क्रुधा प्रयाणव्यवसायतो सुरः ॥
इन भयानक अपशकुनों को देखकर भी, दुष्ट भाग्य से प्रेरित वह असुर क्रोधवश अपने युद्धप्रस्थान से नहीं रुका।
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