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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 18
त्विषामधीशस्य पुरोऽधिमण्डलं शिवाः समेताः परुषं ववाशिरे । सुरारिराजस्य रणान्तशोणितं प्रसह्य पातुं द्रुतमुत्सुका इव ॥
सूर्य के आगे आकाश में एकत्रित गिद्ध तीव्र स्वर में चिल्लाने लगे, मानो वे असुरराज के रक्त को पीने के लिए उत्सुक हों।
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