मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 17
मिलन्महाभीमभुजङ्गभूषणं प्रभुर्दिनानां परिवेषमाद‌धौ । महासुरस्य द्विषतोऽतिमत्सरादि वान्तमासूचयितुं भयङ्करः ॥
भयानक सर्पों से युक्त सूर्य का मंडल विचित्र रूप धारण कर रहा था, मानो महादैत्य के शत्रु के लिए अत्यन्त अनिष्ट का संकेत दे रहा हो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें