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कुमारसंभवम् • अध्याय 15 • श्लोक 14
आगामिदैत्याशनकेलिकाङ्क्षिणी कुपक्षिणां घोरतरा परम्परा । दधौ पदं व्योम्नि सुरारिवाहिनीरुपर्युपर्येत्यनिवारितातपा ॥
दैत्यभक्षण की इच्छा रखने वाले अपशकुन पक्षियों का भयंकर झुंड आकाश में बार-बार उड़ता हुआ असुरसेना के ऊपर मंडराने लगा।
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