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कुमारसंभवम् • अध्याय 14 • श्लोक 7
अथेन्द्रनीलाचलचण्डविग्रहं विषाणविध्वस्तमहापयोधरम् । अधिष्ठितः कासरमुद्धरं मुदा वैरस्वतो दण्डधरस्तमन्वगात् ॥
इन्द्रनील पर्वत के समान भयंकर रूप वाले, अपने सींगों से पर्वतों को तोड़ने वाले भैंसे पर आरूढ़ यमराज दण्ड धारण किए प्रसन्नतापूर्वक उसके पीछे चले।
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