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कुमारसंभवम् • अध्याय 14 • श्लोक 5
प्रयाणकालोचितचारुवेषभृद्वत्रं वहन्पर्वतपक्षदारणम् । ऐरावतं स्फाटिकशैलसोदरं ततोऽधिरुह्य द्युपतिस्तमन्वगात् ॥
प्रयाण के अनुकूल सुंदर वेश धारण किए हुए इन्द्र, पर्वतों के पंखों को काटने वाले वज्र को धारण कर, स्फटिक पर्वत के समान ऐरावत पर आरूढ़ होकर उसके पीछे चला।
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