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कुमारसंभवम् • अध्याय 14 • श्लोक 39
दिगन्तदन्त्यावलिदानहारिभिर्विमानरन्ध्रप्रतिनादमेदुरैः । अनेकवाद्यध्वनितैरनार तैर्जगर्ज गाढं गुरुभिर्नभस्तलम् ॥
दिशाओं में हाथियों के दाँतों की ध्वनि, विमानों की प्रतिध्वनि और अनेक वाद्यों के निनाद से आकाश गम्भीर गर्जना करने लगा।
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