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कुमारसंभवम् • अध्याय 14 • श्लोक 34
महासुराणामवरोधयोषितां कचाक्षिपक्ष्मस्तनमण्डलेषु च । ध्वजेषु नागेषु रथेषु वाजिषु क्षणेन तस्थौ सुरसैन्यजं रजः ॥
क्षण भर में देवसेना की धूल असुरों की स्त्रियों के केश, नेत्रपक्ष्म, स्तनों, ध्वजों, हाथियों, रथों और घोड़ों पर जम गई।
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