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कुमारसंभवम् • अध्याय 14 • श्लोक 31
पीतासितारक्तसितैः सुराचल प्रान्तस्थितैर्धातुरजोभिरम्बरम् । अयत्नगन्धर्वपुरोदयभ्रमं बभार भूम्नोत्पतितैरितस्ततः ॥
सुरपर्वत के विभिन्न रंगों—पीले, काले, लाल और श्वेत—धातुरज से भरा हुआ आकाश, यहाँ-वहाँ उड़ती हुई धूल से मानो बिना प्रयत्न के ही गंधर्वनगर के उदय का भ्रम उत्पन्न कर रहा था।
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