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कुमारसंभवम् • अध्याय 14 • श्लोक 30
विलोकिताः कौतुकिनाऽमरावतीजनेन जुष्टप्रमदेन दूरतः । सुराचलप्रान्तभुवः प्रपेदिरे सुविस्तृतायाः प्रसरं सुसैनिकाः ॥
अमरावती के उत्सुक और आनंदित जनों द्वारा दूर से देखी जाती हुई वह सुसज्जित सेना, सुरपर्वत के विस्तृत प्रदेश में फैल गई।
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