इस प्रकार महायुद्धरूपी समुद्र में क्रीड़ा के लिए उत्सुक देवसेना स्वर्णपर्वत से शीघ्र ही उतरकर, कोलाहल से गूँजती हुई गुफाओं को कंपित करती हुई आगे बढ़ी।
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