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कुमारसंभवम् • अध्याय 14 • श्लोक 23
हेमावनीषु प्रतिबिम्बमात्मनो मुहुर्विलोक्याभिमुखं महागजाः । रसातलोत्तीर्णगजभ्रमात्कुधा दन्तप्रकाण्डप्रहृतानि तेनिरे ॥
स्वर्णभूमि में अपने प्रतिबिंब को बार-बार सामने देखकर महागज भ्रमवश उसे रसातल से आए अन्य गज समझकर अपने दाँतों से प्रहार करने लगे।
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