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कुमारसंभवम् • अध्याय 14 • श्लोक 16
कोलाहलेनोच्चलतां दिवौकसां महाचमूनां गुरुभिर्ध्वजव्रजैः । घनैर्निरुच्चासमभूदनन्तरं दिव्यण्डलं व्योमतलं महीतलम् ॥
देवताओं की विशाल सेना के कोलाहल और भारी ध्वजों के समूह से आकाश, पृथ्वी और समस्त ब्रह्माण्ड मानो घने मेघों से भरकर गूँजने लगे।
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