देवं महेशं गिरीजां च देवीं ततः प्रणम्य त्रिदिवौकसोऽपि । प्रदक्षिणीकृत्य च नाकनाथपूर्वाः समस्तास्तमथानुजग्मुः ॥
तत्पश्चात देवताओं ने महेश और देवी गिरिजा को प्रणाम कर, उनकी प्रदक्षिणा करके इन्द्र के नेतृत्व में उस कुमार का अनुसरण किया।
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