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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 5
उद्दाम दैत्येशविपत्तिहेतुः श्रद्धालुचेताः समरोत्सवस्य । आपृच्छ्य भक्त्या गिरिजागिरीशौ ततः प्रतस्थेऽभिदिवं कुमारः ॥
दैत्यराज के विनाश के हेतु और युद्ध के प्रति उत्सुक मन वाला वह कुमार, गिरिजा और गिरीश से भक्ति सहित विदा लेकर स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर गया।
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