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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 47
स्वदर्शनार्थ समुपेयुषीणां सुदेवतानामदितिश्रितानाम् । पादौ ववन्दे पतिदेवतास्तमाशीर्वचोभिः पुनरभ्यनन्दन् ॥
अदिति के समीप आई हुई देवांगनाओं के चरणों को भी उसने प्रणाम किया और उन्होंने आशीर्वचनों से उसका अभिनंदन किया।
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