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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 45
स देवमातुर्जगदेकवन्द्यौ पादौ तथैव प्रणनाम कामम् । मुनेः कलत्रस्य च तस्य भक्त्या प्रह्वीभवशैलसुतातनूजः ॥
उसने देवमाता अदिति के पूज्य चरणों को भी उसी प्रकार प्रणाम किया और महर्षि की पत्नी को भी भक्ति से झुककर वंदन किया।
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