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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 44
पादौ महर्षेः किल कश्यपस्य कुलादिवृद्धस्य सुरासुराणाम् । प्रदक्षिणीकृत्य कृताञ्जलिः सन्षङ्गिः शिरोभिः स नतैर्ववन्दे ॥
सुर और असुरों के आदि पुरुष महर्षि कश्यप के चरणों की प्रदक्षिणा कर, हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर उसने उन्हें प्रणाम किया।
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