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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 42
निर्दिष्टवर्मा बिवुधेश्वरेण सुरैः समग्रैरनुगम्यमानः । स प्राविशत्तं विविधाश्मरश्मिच्छिन्नेन सोपानपथेन सौधम् ॥
देवताओं के स्वामी द्वारा निर्दिष्ट कवच धारण कर, समस्त देवताओं से घिरा हुआ वह विभिन्न रत्नों की किरणों से युक्त सीढ़ियों वाले उस भवन में प्रवेश कर गया।
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