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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 39
उत्कीर्णचामीकरपङ्कजानां दिग्दन्तिदानद्रवदूषितानाम् । हिरण्यहंसव्रजवर्जितानां विदीर्णवैदूर्यमहाशिलानाम् ॥
स्वर्णकमलों से युक्त किन्तु दिशाओं के हाथियों के मदजल से दूषित, स्वर्णहंसों के समूह से रहित और विदीर्ण वैदूर्य शिलाओं से युक्त उस स्थान को देखकर।
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