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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 33
ततो ब्रजन्नन्दननामधेयं लीलावनं जम्भजितः पुरस्तात् । विभिन्नभग्नोद्धृतशालसङ्घ प्रेक्षाञ्चकार स्मरशत्रुसूनुः ॥
तत्पश्चात इन्द्र के शत्रु को जीतने वाला वह कुमार आगे बढ़कर ‘नन्दन’ नामक लीलावन में पहुँचा और वहाँ टूटे-बिखरे तथा उखड़े हुए शालवृक्षों के समूह को देखा।
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