अत्यन्त नम्रता से सिर झुकाकर उसने अपनी माता के चरणों को प्रणाम किया; तब उसकी माता के आनंदाश्रुओं की वर्षा उसके लिए वीरश्रेष्ठ के अभिषेक के समान हो गई।
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