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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 24
सुराङ्गनानां जलकेलिभाजां प्रक्षालितैः सन्ततमङ्गरागैः । प्रपेदिरे पिञ्जरवारिपूरां स्वर्गौकसः स्वर्गधुनीं पुरस्तात् ॥
स्वर्ग की अप्सराओं के जलक्रीड़ा से धुले हुए अंगरागों से युक्त, हल्के पीले जल से भरी स्वर्गगंगा के तट पर देवता पहुँचे।
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