तत्पश्चात इन्द्र के शत्रु के वध के इच्छुक गिरिजा के पुत्र के पीछे-पीछे देवता वैसे ही चल पड़े जैसे स्मरारि शिव के प्रमथगण त्रिपुर को जलाने के लिए चारों ओर से बढ़ते हैं।
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