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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 19
घनप्रमोदाश्रुतरङ्गिता क्षैर्मुखैश्चतुर्भिः प्रचुरप्रसादैः । अथो अचुम्बद्विधिरादिवृद्धः षडाननं षड्डु शिरःसु चित्रम् ॥
गहन आनंद के आँसुओं से युक्त चार मुखों वाले ब्रह्मा ने अत्यन्त प्रसन्न होकर उस षडानन के छहों मुखों को क्रमशः चूमा।
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