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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 14
भीत्यालमद्य त्रिदिवौकसोऽमी स्वर्ग भवन्तः प्रविशन्तु सद्यः । अत्रैव मे दृक्पथमेतु शत्रुर्महासुरो वः खलु दृष्टपूर्वः ॥
हे देवताओं, अब भय का त्याग करो और तुरंत स्वर्ग में प्रवेश करो; वह महादैत्य, जिसे तुम पहले देख चुके हो, यहीं मेरी दृष्टि के सामने आए।
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