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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 12
सुरालयालोकनकौतुकेन मुदा शुचिस्मेरविलोचनास्ते । दधुः कुमारस्य मुखारविन्दे दृष्टि द्विषत्साध्वस कातरान्ताम् ॥
स्वर्गलोक को देखने की उत्सुकता से प्रसन्न और हल्की मुस्कान से युक्त देवताओं ने अपने भय को त्यागकर अपनी दृष्टि कुमार के मुखकमल पर स्थिर कर दी।
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