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कुमारसंभवम् • अध्याय 13 • श्लोक 1
प्रस्थानकालोचितचारुवेषः स स्वर्गिवगैरनुगम्यमानः । ततः कुमारः शिरसा नतेन त्रैलोक्यभर्तुः प्रणनाम पादौ ॥
प्रस्थान के समय के अनुरूप सुंदर वेश धारण किए हुए और देवताओं द्वारा अनुसरण किए जाते हुए उस कुमार ने सिर झुकाकर त्रिलोकी के स्वामी शिव के चरणों में प्रणाम किया।
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