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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 9
कपर्दमुद्भद्धमहीनमूर्धरत्नांशुभिर्भासुरमुल्लसद्भिः । दधानमुच्चैस्तरमिद्धधातोः सुमेरुशृङ्गस्य समत्वमाप्तम् ॥
जटाओं से बंधे हुए सिर पर प्रकाशित रत्नों की किरणों से शोभायमान, वह ऊँचे धातु से बने सुमेरु पर्वत के शिखर के समान प्रतीत हो रहा था।
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