मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 59
असुरयुद्धविधौ विबुधेश्वरे पशुपतौ वदतीति तवात्मजम् । गिरीजया मुमुदे सुतविक्रमे सति न नन्दति का खलु वीरसूः ॥
जब देवताओं के स्वामी के सामने पशुपति ने तुम्हारे पुत्र को असुरों के युद्ध के लिए नियुक्त किया, तब गिरिजा अपने पुत्र के पराक्रम पर अत्यन्त प्रसन्न हुई—वीर पुत्र होने पर कौन माता आनंदित नहीं होती?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें