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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 54
अहो अहो देवगणाः सुरेन्द्रमुख्याः शृणुध्वं वचनं ममैते । विचेष्टते शङ्कर एष देवः कार्याय सज्जो भवतां सुताद्यैः ॥
हे देवगण और इन्द्र आदि! मेरे वचन सुनो—यह शंकर देव तुम्हारे कार्य के लिए तत्पर हैं और अपने पुत्र आदि के साथ सहायता करेंगे।
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