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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 47
स्तुत्या पुरास्माभिरुपासितेन पितामहेनेति निरुपितं नः । सेनापतिः संयति दैत्यमेतं पुरः स्मरारातिसुतो निहन्ति ॥
पूर्व में हमारी स्तुति से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने यह कहा था कि युद्ध में इस दैत्य का वध स्मरारि शिव के पुत्र द्वारा सेनापति के रूप में किया जाएगा।
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