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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 43
ततो गिरीशस्य गिरां विरामे जगाद लब्धेऽवसरे सुरेन्द्रः । भवन्ति वाचोऽवसरे प्रयुक्ता ध्रुवं फलाविष्टमहोदयाय ॥
गिरीश के वचनों के विराम होने पर अवसर पाकर इन्द्र ने कहा—उचित समय पर कही गई वाणी निश्चय ही महान फल प्रदान करती है।
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