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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 42
इतीरिते मन्मथमर्दनेन सुराः सुरेन्द्रप्रमुखा मुखेषु । सान्द्रप्रमोदाश्रुतरङ्गितेषु दधुः श्रियं सत्वरमाश्वसन्तः ॥
कामदेव का दमन करने वाले शिव के इस कथन को सुनकर, इन्द्र सहित देवताओं के मुखों पर गहन आनंदाश्रुओं की तरंगें छा गईं और वे शीघ्र ही प्रसन्न होकर पुनः तेजस्वी हो उठे।
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