कामदेव का दमन करने वाले शिव के इस कथन को सुनकर, इन्द्र सहित देवताओं के मुखों पर गहन आनंदाश्रुओं की तरंगें छा गईं और वे शीघ्र ही प्रसन्न होकर पुनः तेजस्वी हो उठे।
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