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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 40
सुराः सुराधीशपुरःसराणां समीयुषां वः सममातुराणाम् । तद्भूत लोकत्रयजित्वरात्किं महासुरात्तारकतो विरुद्धम् ॥
हे देवताओं! तुम सब अपने स्वामी इन्द्र के साथ यहाँ आए हो—क्या वह त्रिलोकी को जीतने वाला महादैत्य तारकासुर तुम्हारे विरोध में खड़ा हो गया है?
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