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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 4
इतस्ततोऽथ प्रतिबिम्बभाजं विलोकमानः स्फटिकाद्रिभूमौ । आत्मानमप्येकमनेकधा स व्रजन्विभोरास्पद्‌माससाद ॥
स्फटिक पर्वत की भूमि पर इधर-उधर प्रतिबिम्बों को देखते हुए, अपने एक ही रूप को अनेक रूपों में प्रकट होता हुआ देखकर, वह अंततः महादेव के निवास स्थान पर पहुँचा।
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