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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 39
दिवौकसो वो हृदयस्य कस्मात्तयाविधं धैर्यमहार्यमार्याः । अगादगाधस्य जलाशयस्य ग्रीष्मातितापादिवशादिवाम्भः ॥
हे श्रेष्ठ देवगण! तुम्हारे हृदय का वह अटल धैर्य कहाँ चला गया, जैसे ग्रीष्म की तीव्र गर्मी से अगाध जलाशय का जल भी सूख जाता है?
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