मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 38
अनन्यसाधारणसिद्धमुच्चैस्तदैवतं धाम निकामरम्यम् । कस्माद कस्मान्निरगाद्भवत्र्यश्चिरार्जितं पुण्यमिवा पचारात् ॥
तुम्हारा वह अद्वितीय, अत्यन्त रमणीय और सिद्ध देवधाम किस कारण से तुमसे दूर हो गया, जैसे लंबे समय से अर्जित पुण्य किसी अपराध से नष्ट हो जाता है?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें