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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 33
क्रमेण चान्येऽपि विलोकनेन सम्भाविताः सस्मितमीश्वरेण । उपाविशंस्तोषविशेषमाप्ता दृग्गोचरे तस्य सुराः समग्राः ॥
क्रमशः अन्य देवता भी शिव की मुस्कान से सम्मानित होकर, विशेष संतोष प्राप्त करते हुए उनके समक्ष बैठ गए।
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