अत्यन्त भक्तिभाव से युक्त देवताओं ने अपने मस्तकों को भूमि पर झुकाकर पादपीठ के समीप स्थित होकर क्रमशः गणों के सामने पुरारि शिव को प्रणाम किया।
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