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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 31
सुभक्तिभाजामधि पादपीठं प्रान्तक्षितिं नम्रतरैः शिरोभिः । ततः प्रणेमुः पुरतो गणानां गणाः सुराणां क्रमतः पुरारिम् ॥
अत्यन्त भक्तिभाव से युक्त देवताओं ने अपने मस्तकों को भूमि पर झुकाकर पादपीठ के समीप स्थित होकर क्रमशः गणों के सामने पुरारि शिव को प्रणाम किया।
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